कैसा भी जुर्म कमल चोपड़ाआवारा घूम रहे आदमियों, लड़कों, बच्चों, सुअरों, कुत्तों और मुर्गों में से सबसे पहले कुत्तों ने ही उनका विरोध किया था। भौंकते हुए कुत्ते को पत्थर मार-मार कर खदेड़ने के बाद वे अंजलि की झुग्गी के बाहर जुटे थे। उन्हें इत्मीनान था कि उनके नाम की यहाँ काफी दहशत है। शाबू और उसके साथी से पंगा लेने की यहाँ किसी में हिम्मत नहीं है। झुग्गियों के टूटे-फूटे दरवाजों और टूटी फट्टियों से बने छेदों और फटी तिरपालों से बने झरोखों की आड़ में झाँकती घूरती हुई आँखें हैरत और दहशत से फटी जा रही थीं। गुण्डागर्दी की