MTNL की घंटी - 8

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ताया जी आ गए कप टूटने की आवाज सुन कर.."महक , चिंटू कही लगी तो नहीं""नहीं ताया जी ..ठीक हूं "महक ने धीरे से कहा "अच्छा मैं भी चलता हूं अब देर हो रही है बस आपसे मिलने का मन था फाइल्स कल ड्राइवर ले जाएगा .अपना ध्यान रखिए"कह कर देव मुड़ने लगा तो ताया जी ने उसे कस कर गले लगा लिया।उसने हल्की नजर महक पर डाली ..उसके उड़े रंग को देखा और बिना एक क्षण रुके चला गया।महक…अब भी दरवाज़े के पास…जैसे जमीन में गड़ी खड़ी थी…चेहरा एकदम सफेद…हाथ काँप रहे थे…और दिल… जैसे किसी तूफ़ान में फँस गया