ऋण

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​ऋणकमल चोपड़ा​उसने जानबूझकर दीदी के घर जाने के लिए ऐसा ही वक्त चुना था, जबकि जीजाजी और बच्चे घर पर ना हों और दीदी अकेली हो। उसे अचानक आया देखकर दीदी का चेहरा खिल उठा था, लेकिन अगले ही क्षण हैरत से एकाएक मुरझा-सा गया। अपने आगे रखी सिलाई मशीन को धकेलती हुई दीदी उठ खड़ी हुई। खैर-खैरियत पूछने के बाद दीदी ने उससे उसके यों अचानक चले आने का मकसद पूछ डाला था। भले ही एकदम से अपने आने का मकसद कह डालना उसे ठीक नहीं लगा। मिलने को मन हो रहा था, बस इसलिए चला आया—कहकर वह बात