विद्यालय से घर पहुँचते ही माँ ने घबराहट में बताया कि हमारी गाय ‘दारा’ घर नहीं लौटी है और उसका बछड़ा भूख से बिलख रहा है। मैंने अपने साथी राजेंद्र यादव के साथ उसे खोजने का निश्चय किया। हम गाँव के समीप से होते हुए खेतों की ओर निकल पड़े। मेरे बड़े पिताजी के पुत्र, सत्या भी हमारे साथ हो लिए। सूरज ढलने को था, पर दारा का पता नहीं चला। खोजते-खोजते हम गाँव से दूर ‘खार’ ( सुदूर इलाके) की ओर बढ़ गए। अंधेरा गहराने लगा था, तभी नहर की मेढ़ से उतरते समय मेरा संतुलन बिगड़ा और मैं