हमारे मोहल्ले में हर घर के दरवाजे पर एक अदृश्य लक्ष्मण रेखा खिंची होती है। इसे सिर्फ लड़कियां ही देख पाती हैं। दयाशंकर जी इस रेखा के सबसे बड़े और निष्ठावान चौकीदार हैं। उनकी बेटी गुंजन इसी रेखा के घेरे में बड़ी हुई है। दयाशंकर जी को लगता है कि संस्कार सिर्फ लड़कियों की चप्पल की आवाज में कैद होते हैं।दयाशंकर जी की नाक बहुत संवेदनशील है। उन्हें दूर से ही उड़ती हुई मर्यादा की गंध आ जाती है। वह अक्सर कहते हैं कि मर्यादा का पालन करना कोई मुश्किल काम नहीं है। बस अपनी इच्छाओं को एक संदूक में