[42]“कपिल महोदय, क्या प्रमाण लेकर आज ऊपस्थित हुए हो?” न्यायाधीश ने पूछा। “महाशय, कभी कभी व्यक्ति का चरित्र ही स्वयं प्रमाण होता है। तब अन्य किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं रहती।”“क्या कहना चाहते हो?”“मैं कुछ दिखाना चाहता हूँ।” कपिल ने वत्सर के मंदिर के भीतरी भाग का चलचित्र प्रस्तुत किया। कृष्ण की प्रतिमा पर उसे रोक दिया। “यह वत्सर के मंदिर का दृश्य है। इस मंदिर को स्वयं वत्सर ने अपने हाथों से बनाया है। शिल्पकार वत्सर ने! मैं सत्य कह रहा हूँ न वत्सर?”“जी।”“महाशय, समग्र भारत में और अन्य देशों में कृष्ण के सेंकड़ों हजारों मंदिर हैं। आपने भी अनेक मंदिर