मुनक्का के बीज

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कहानी : राजनारायण बोहरे   मुनक्का के बीज   वैद्य जी ने सिल्ली  की नब्ज पर उँगली रखी। आँखें बंद करके चुप हो के बैठ गये, जैसे किसी गहरे गणित में डूब गए हों। वैद्य जी उम्र से अधेड़ थे, माथे पर बड़ी-सी तिलक की एक लकीर, आँखों पर मोटा चश्मा और बगल में हमेशा जड़ी-बूटियों की थैलियाँ । उनके पास बैठते ही रोगी और परिजन को एक अलग-सी तसल्ली मिलती थी, मानो अब सब-कुछ ठीक हो जाएगा। दुबे जी की बहन सिल्ली  पिछले हफ़्ते से तेज बुखार में तप रही थी। गाँव के लोग कहते –“अरे, यह तो टाइफाइड