शक्ति धारण करो

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ऋगुवेद सूक्ति-(60) की व्याख्या "श्रेष्ठ यश:"ऋगुवेद --4/33/11भावार्थ --श्रेष्ठ यश प्राप्त करो। ऋग्वेद 4/33/11 में “श्रेष्ठ यश:” का भाव वास्तव में मनुष्य को उच्च जीवन-मूल्यों की ओर प्रेरित करता है। मंत्र (संक्षिप्त भाव सहित)इस सूक्त में ऋषि वामदेव देवताओं (विशेषतः इन्द्र) के गुणों का वर्णन करते हुए मनुष्य को भी प्रेरित करते हैं कि वह सत्कर्म, पराक्रम और सदाचार के द्वारा यश प्राप्त करे। भावार्थ (सरल भाषा में) “मनुष्य को ऐसा जीवन जीना चाहिए जिससे वह श्रेष्ठ यश (उत्तम प्रतिष्ठा) प्राप्त करे।”यह यश केवल बाहरी प्रसिद्धि नहीं है, बल्कि—सत्य आचरण से मिलने वाला सम्मान, धर्म और कर्तव्य पालन से प्राप्त प्रतिष्ठा, समाज के हित में किए