सौदे की शादी - 4

  • 525
  • 171

सुबह की हल्की धूप मालहोत्रा मैंशन की ऊँची खिड़कियों से अंदर आ रही थी।सुनहरी किरणें संगमरमर के फर्श पर पड़ रही थीं, लेकिन उस रोशनी में भी एक अजीब सी ठंड थी जैसे रात की नफरत अभी भी इस घर की हवा में जमी हुई हो।अनाया की आँखें खुलीं तो सबसे पहले उसे दीवार पर वही पुरानी तस्वीर दिखी आरव और वो लड़की, दोनों हँस रहे थे, और नीचे लिखा था “Forever begins here.”उसने तकिए पर सिर घुमाया आरव कमरे में नहीं था।सन्नाटा था। बस घड़ी की टिक-टिक गूँज रही थी, जैसे वक्त भी उसे याद दिला रहा हो कि