रात के 11 बजे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा धीरे-धीरे फैल रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर लंबी परछाइयाँ बना रही थी। एक आदमी बेचैनी से सड़क किनारे टहल रहा था। उसके हाथ में फूलों का एक छोटा-सा गुलदस्ता था, लेकिन चेहरे पर खुशी नहीं, बल्कि घबराहट साफ दिखाई दे रही थी। वह बार-बार अपनी घड़ी देख रहा था। 11:05… 11:12… 11:20…