बॉंस-फूस-खपच्ची

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​बाँस-फूस-खपच्ची कमल चोपड़ा​झुग्गी के अन्दर जगह कम थी। वे कुल चार जने थे। तीन अन्दर घुस आये थे। एक बाहर ही खड़ा रहा था। घुसते ही उन्होंने जयसुखलाल से तीन हजार रुपये माँगे। सुना-अनसुना सा करते हुए जयसुखलाल ने कुछ जवाब नहीं दिया। ज्यों-का-त्यों बैठा रहा। अपने शब्द दोहराते हुए उन्होंने फिर से उससे पैसे माँगे। किसी ढीठ की तरह बीड़ी निकालकर सुलगाने लगा। वे माँ-बहन की गालियों पर उतर आये। जयसुखलाल पर किसी तरह का असर ना देखकर उनमें से एक ने चाकू निकालते हुए कहा, “आज तो हम तीन हजार लेकर ही जायेंगे वरना...”​झुँझलाते हुए जयसुख ने साफ-साफ कह