मुद्दा

​मुद्दाकमल चोपड़ा ​इससे गिरी हुई हरकत और क्या होगी? बेटी की उम्र की बच्ची के साथ रँगे हाथों वह पकड़ा गया।​घोर कलियुग है वर्ना सूरज टूटकर गिर जाता या धरती फट जाती लेकिन कुछ भी नहीं हुआ। आग की-सी तेज गति से फैल गयी थी वह खबर झुग्गी बस्ती में। पिनपिनाते बच्चों, आवारा लड़कों, कड़कड़ाती औरतों और वाही-तबाही बकते बूढ़े-बुढ़ियों की अच्छी-खासी भीड़ जुट आयी थी वहाँ।​दूसरों के झमेलों में झाँककर मजा लेने का मौका चूकना नहीं चाहती थीं आसपास की झुग्गियों में रहनेवाली औरतें। कुछ औरतें अवाक् थीं। डरी, सहमी और कुछ तैश में आकर आपे से बाहर हुई