Chapter 1 नायक: अनकही जंग की शुरूआतआर्यन की जिदंगी एक ऐसी किताब थी जिसके पन्ने समय बीतने के साथ पुराने और धूल भरे हो गए थे। उन पन्नों पर लिखी हर लाइन में संघर्ष था, जिम्मेदारी थी… और कहीं गहराई में दबे हुए अधूरे सपने भी थे। उसकी असलियत तो अलार्म की उस आवाज से शुरू होती थी, जो सुबह 6 बजे उसके कमरे की खामोशी को चीर देती। यह आवाज सिर्फ नींद नहीं तोड़ती थी, बल्कि उसे हर रोज उसकी जिम्मेदारियों की याद भी दिलाती थी। नींद, जो शायद पिछले सात सालों से उसने ठीक से ली ही नहीं थी। सुबह