जड़ें

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जड़ें  सावित्री देवी अक्सर खिड़की के पास बैठ जातीं। बाहर लगे नीम के पेड़ को देखतीं और सोचतीं— “जैसे इस पेड़ की जड़ें मिट्टी से जुड़ी हैं, वैसे ही इंसान की जड़ें उसके परिवार से जुड़ी होती हैं। अगर जड़ें कट जाएँ, तो पेड़ सूख जाता है।” वृद्धाश्रम की लंबी गलियों में अक्सर सन्नाटा पसरा रहता था। दीवारों पर टंगे कैलेंडर और घड़ी की टिक-टिक समय के बीतने का अहसास कराते थे। इन्हीं गलियों में एक कमरे में रहती थी सावित्री देवी, सत्तर वर्ष की एक वृद्ध माँ। सावित्री देवी का चेहरा झुर्रियों से भरा था, लेकिन उन झुर्रियों में