भटका रास्ता

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भटका रास्ता कॉलेज का विशाल गेट जैसे ही सामने आया, अमल के कदम अपने आप तेज हो गए। चेहरे पर उम्मीद की चमक थी, आँखों में अनगिनत सपने। उसने जेब से मुड़ा-तुड़ा कागज निकाला और एक बार फिर विज्ञापन को देख लिया—“क्लर्क पद हेतु चयन सूची”। “इस बार तो हो ही जाएगा…” उसने मन ही मन खुद को दिलासा दिया। कॉलेज परिसर में हलचल थी। कुछ लड़के हँसते हुए बाहर निकल रहे थे, कुछ उदास चेहरे लिए चुपचाप दीवारों से टिके खड़े थे। अमल की नजर सीधे नोटिस बोर्ड पर गई। उसने तेजी से नामों की सूची पढ़नी शुरू की।