झांसी: सौदा, कर्ज और बदला - 6

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Episode 6:“जाल, जज़्बात और पहला वार”रात का सन्नाटा…राठौड़ हवेली के हर कोने में कुछ छुपा हुआ था। वो शिकारी जो अपने शिकार में कभी नहीं चुका।लेकिन आज… शिकार नहीं… शिकारी जाग चुका था।भार्गवी बालकनी में खड़ी थी।फोन उसके हाथ में था… और आँखों में ठंडा इरादा। Unknown Call…उसने बिना झिझक कॉल उठाया।“हाँ, बोलो।”दूसरी तरफ से आवाज़ आई—“Boss… हवेली में entry हो चुकी है।अब बस जाल बिछाना बाकी है।” आप बस ऑर्डर दे बॉस।भार्गवी की आँखों में हल्की चमक आई।“Good…इस बार कोई गलती नहीं होनी चाहिए।”“जी Boss।” कॉल कट। (Inner Voice)“ये खेल अब खत्म होगा…और इस बार… कोई बचकर नहीं जाएगा।”अचानक