Episode 5: जाल का मालिक… और छुपा हुआ सचरात का सन्नाटा हवेली को अपनी गिरफ्त में ले चुका था।हर दरवाज़ा बंद… हर आवाज़ थमी हुई…लेकिन इस खामोशी के पीछे— एक खेल चल रहा था।भार्गवी अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ी थी।उसकी आँखें अंधेरे को चीरती हुई दूर कहीं देख रही थीं—जैसेवो सिर्फ देख नहीं रही… नियंत्रण कर रही हो। फोन वाइब्रेट हुआ।उसने बिना देर किए कॉल उठाया।“Status?”दूसरीतरफ से तुरंत जवाब आया—“सभी लोग अपनी position पर हैं, Boss।”उसकी आँखों में हल्की-सी चमक आई।“Target?”“Movement शुरू हो चुका है… लेकिन अंदर से confirmation चाहिए।”कुछ सेकंड की खामोशी।फिर—“कोई गलती नहीं होनी चाहिए,”उसकी आवाज़