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सब लोग है यहां बस मैं ही नहीं हूं क्योंकि हम human being कम और Deta points ज्यादा लगते हैं।हम सबका अधिकतर समय screen पर गुजरता है, हम सब पास तो हैं पर साथ कोई नहीं। तो कभी कभी लगता है-  मेरी ज़िंदगी एक अजीब से डर से गुजर रही है जहां हर पल किसी से अलग होने का डर लगा रहता है, बहुत सवाल है भीतर, पर जवाब एक नहीं। मैं बैठी हूं और रात भी बहुत हो चुकी हैं कहीं कोई शोर नहीं आसमान में लाखों तारें है, पर मुझसे मिलो दूर।। मेरे पास ऐसा कोई नहीं जो