बारिश तेज़ हो रही थी। शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ी वह काँच की इमारत इतनी ठंडी लग रही थी, जैसे उसके अंदर इंसान नहीं, केवल मशीनें रहती हों।अनाया शर्मा के हाथ काँप रहे थे। उसकी आँखों में डर नहीं था… बस एक खामोश, हार मान लेने वाली भावना थी।उसके सामने बैठा था आरव मल्होत्रा — मल्होत्रा समूह के उद्योगों का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, और वही व्यक्ति जिसने उसकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी थी।“अनुबंधित विवाह,” उसने बिना ऊपर देखे कहा। उसकी आवाज़ उतनी ही ठंडी थी जितनी उसकी नज़रें।“हस्ताक्षर करो, अनाया। तुम्हें पता