उस दिन जब चित्र ने सबके सामने पहली बार आवाज़ उठाई थी…घर कुछ पल के लिए शांत जरूर हुआ था…लेकिन वो शांति…तूफान से पहले की खामोशी थी। नीतू की अगली चालरात का समय था।सब अपने-अपने कमरों में थे।नीतू धीरे से दादी माँ के कमरे में गई।हाथ में गरम दूध और हल्दी वाला गिलास।“दादी माँ… ये लीजिए, आपके लिए बनाया है।”दादी का दिल तो वैसे ही उसके मीठेपन में फँसा हुआ था।“अरे बहू, तू ही तो है जो मेरा ख्याल रखती है…”नीतू ने मौका देखा…और ज़हर घोलना शुरू किया।धीरे से बोली—“दादी माँ… आज जो चित्र ने बोला…आपको सच में लगा वो