आशिकी.....अब तुम ही हो। - 8

अध्याय: 8_________________________________________दृश्य: अगला दिन , सुबह , श्रद्धा का घर , लिविंग एरिया।श्रद्धा,सोफे के पास खड़ी अपने बैग में कुछ सामान रख रही है और एक हाथ में पराठे को रोल करके खा भी रही है ।श्रद्धा:(पराठे की एक बाइट लेते हुए ) ये पार्थ का बच्चा अभी तक तैयार नही हुआ। (वंदना से) मां, इस शैतान को जल्दी तैयार कीजिए, मुझे देर हो रही है ।(वंदना किचन से दो टिफिन बॉक्स लाती है।)वंदना:(पार्थ के बैग में टिफिन बॉक्स रखते हुए) हो गया है तैयार !, तू आराम से बैठ कर नाश्ता कर न... , क्यों हड़बड़ा रही है?श्रद्धा: मां