भक्त प्रह्लाद - 11

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विष बना अमृतवधिकों के हर प्रहार से प्रह्लाद बच गये। उन पर किसी भी अस्त्र-शस्त्र का प्रभाव नहीं हुआ था। असुरराज हिरण्यकशिपु ने भी प्रमाण के रूप में तलवारों, भालों एवं खड्ग को खंडित दशा में देखा था। वह मूर्ख अभी भी यह नहीं समझ पाया था कि प्रह्लाद पर किसी भी अस्त्र-शस्त्र का कोई प्रभाव न होना प्रभु श्रीहरि विष्णु की लीला है, किंतु उसकी आँखों पर तो अपने सर्वशक्तिमान होने के अभिमान की काली पट्टी बँधी हुई थी, तो फिर उसे वास्तविकता का भान कैसे होता! वह शक्ति के मद में अंधा हो चुका था, जिस कारण उसे