Episode 3: अनजाना रिश्ता, छुपा हुआ खेलशाम ढल चुकी थी।राठौड़ हवेली रोशनी से जगमगा रही थी—बाहर से सब कुछ शाही, भव्य… पर भीतर का माहौल अजीब-सा ठंडा था।गाड़ी जैसे ही हवेली के बड़े दरवाज़े के सामने रुकी,भार्गवी ने पहली बार उस जगह को ध्यान से देखा।ऊँची-ऊँची दीवारें…भारी लोहे का गेट…और अंदर—हर कोने पर खड़े लोग।ये घर कम…एक किला ज़्यादा लग रहा था।“उतरिए,”मिहिर की ठंडी आवाज़ आई।भार्गवी बिना कुछ कहे नीचे उतरी।उसका दुपट्टा हवा में हल्का-सा लहराया—पर उसकी चाल में कोई हिचक नहीं थी।जैसे वो यहाँ आई नहीं…बल्कि किसी मकसद से आई हो।अंदर कदम रखते ही—ढोल-नगाड़ों की आवाज़ गूंज उठी।“राठौड़ परिवार