मनोरमा देवी के कानों तक यह खबर पहुँच चुकी थी कि उनके राजा बेटे की नौकरी जा चुकी है। यह खबर उनके लिए किसी वज्रपात से कम नहीं थी, लेकिन असली कहर तो अभी टूटना बाकी था। अब तक जो काया एक मासूम, सेवाभावी नौकरानी का मुखौटा ओढ़े हुए थी, वह अब अपने असली और भयानक रंग में आ चुकी थी। उसे पता चल गया था कि तिजोरी अब खाली होने वाली है, इसलिए उसने घर की सत्ता अपने हाथ में लेने की कवायद शुरू कर दी।मनोरमा, जो पिछले कई दिनों से अपमान के डर से अपने कमरे में दुबकी