झांसी: सौदा, कर्ज और बदला - 2

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Episode 2: सौदे की सुबहरात खत्म हुई…पर उस घर में अंधेरा अभी भी बाकी था।आँगन में ठंडी हवा चल रही थी,लेकिन भीतर—हर साँस भारी थी।गुणवती की आँखें पूरी रात नहीं लगीं।वो बस अपनी बेटी को देखती रही…जैसे हर पल उसे याद कर लेना चाहती हो।कोने में बैठे प्रताप सिंह चुप थे।इतने चुप कि जैसे आवाज़ देना भी भूल गए हों।और भार्गवी…वो खिड़की के पास खड़ी थी।आसमान में हल्की रोशनी फैल रही थी—एक नई सुबह का इशारा।लेकिन उसके लिए…ये कोई नई शुरुआत नहीं थी।ये एक फैसले की सुबह थी।“दीदी…”नक्षत्रा की नींद भरी आवाज़ आई।भार्गवी ने मुड़कर उसे देखा।वो भागकर उसके पास