MTNL की घंटी - 5

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उस रात के बाद…उस रात के बाद पहली बार देव को चैन की नींद आई।कान्हा भी बिना किसी दौरे के गहरी नींद में सोया रहा।देव हर थोड़ी देर में उठकर उसे देखता—कभी उसके माथे पर हाथ फेरता,कभी सीने पर हाथ रखकर उसकी साँसें महसूस करता…और फिर खुद ही तसल्ली लेकर वापस लेट जाता।जैसे उसे डर हो—कहीं ये सुकून… बस एक सपना न हो।दूसरी तरफ… महक की रात जागते हुए बीती।देव की टूटी हुई आवाज़…उसकी सिसकियाँ…कान्हा की मासूमियत…सब उसके भीतर कहीं गहरे उतर गया था।फोन पर हुई वो बातचीत—अब सिर्फ एक घटना नहीं रही थी…वो उसकी आत्मा के किसी कोने में