भक्त प्रह्लाद - 10

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विफल रहा प्राणदंडअसुरराज हिरण्यकशिपु के आदेशानुसार वधिक प्रह्लाद को ऐसे घनघोर जंगल में ले गए, जहाँ पृथ्वी तक सूर्य की किरणें नहीं पहुँच पाती थीं। दिन के समय भी वहाँ ऐसा प्रतीत होता था, जैसे रात घिर आई हो। प्रह्लाद ने निडरता से चारों ओर दृष्टि घुमाकर देखा। ऊँचे-ऊँचे विशाल तनों वाले वृक्ष आकाश को चूमने के लिए तैयार थे। जंगली हिंसक जानवरों की अति भयानक डरावनी आवाजें वातावरण को और अधिक डरावना बना रही थीं। अजीब सा कोलाहल उन वधिकों के हाथों में धारण किए हुए खड्गों को और भी अधिक हिंसक बना रहा था, किंतु जिसके साथ स्वयं