माँ-बेटी के पवित्र और भावुक रिश्ते पर यह कहानी आपकी रूह को झकझोर देगी:अधूरी लोरी: ममता का आखिरी रंगएक छोटे से घर में मीरा अपनी 6 साल की बेटी, परी के साथ रहती थी। मीरा एक मज़दूर थी, जो दिन भर धूप में पत्थर तोड़ती थी ताकि अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा दे सके। परी को अपनी माँ के हाथों की दरारें देखना पसंद नहीं था, वह रोज़ उन हाथों पर अपनी छोटी-छोटी हथेलियों से मलाई लगाती और कहती, "माँ, जब मैं बड़ी हो जाऊँगी, तो तुम्हारे हाथ कभी पत्थर नहीं छुएंगे।"मीरा बस मुस्कुरा देती और रात को परी को