राघव के लिए वह दिन सिर्फ एक हार नहीं था, बल्कि जैसे पूरी दुनिया ही उसके खिलाफ हो गई थी। सुबह तक वह खुद को बहुत मजबूत समझ रहा था। उसे यकीन था कि इस बार जीत उसी की होगी। वह महीनों से मेहनत कर रहा था। देर रात तक पढ़ना, सुबह जल्दी उठकर अभ्यास करना, हर गलती को सुधारना, हर कमजोरी पर काम करना, सब कुछ उसने दिल से किया था। उसे लग रहा था कि अगर मेहनत सच्ची हो, तो जीत तय है।लेकिन जीवन हमेशा हमारी उम्मीदों के हिसाब से नहीं चलता।उस दिन शहर के बड़े इंटरस्कूल भाषण