त्रिशा... - 42

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" बात ऐसी है जी कि अब ना.......आपको ना.......शराब पीनी........ छोड़नी क्या बिल्कुल बंद करनी पड़ेगी.........क्यो........" त्रिशा ने धीरे धीरे अपनी बात कहनी शुरु की। "यार त्रिशा, मैनें तुमसे पहले भी कहा है कि मैं जानबूझ के नहीं पीता हूं!!!!!!!! वो बस मुझे दोस्तों के साथ थोड़ी बहुत पीनी पड़ जाती है!!!!!!!!"  राजन ने त्रिशा की बात को बीच में रोकते हुए अपनी सफाई देते हुए दुखी मन से कहा। फिर राजन ने त्रिशा का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी आंखों में देखकर उससे कहने लगा, "तुम तो जानती हो यार, तुमने तो देखा है ना कि मैं कितनी कोशिश