वेदान्त 2.0 - भाग 37

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  सूक्ष्म का धर्म — बिंदु से ब्रह्मांड तक   — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 प्रस्तावना मनुष्य की आँखें हमेशा बड़े को देखती हैं।हम पर्वतों को देखते हैं, महासागरों को देखते हैं, आकाशगंगाओं को देखते हैं — और सोचते हैं कि यही शक्ति है। लेकिन अस्तित्व का रहस्य कुछ और है। जो दिखाई देता है, वह अक्सर वास्तविक शक्ति नहीं होता।वास्तविक शक्ति वहाँ छिपी होती है जहाँ मनुष्य की दृष्टि सामान्यतः नहीं जाती — सूक्ष्म में। एक बीज को देखो। वह इतना छोटा होता है कि हथेली में खो जाता है।लेकिन उसी बीज के भीतर पूरा वृक्ष छिपा होता है — उसकी शाखाएँ, पत्तियाँ, फूल, फल और आने