खुलासा

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                 “मां ने बैंंक में अपना खाता कब खोला?” मां की स्मृतियों में से एक नई कड़ी मैं ने खोलनी चाही। उनकी मृत्यु के छठे दिन के बाद भी बाबूजी और मैं उन की बातों से अघाए न थे।                  “वह संदर्भ याद रखने लायक नहीं,”बाबूजी गंभीर हो गए, “तुम केवल यह सोचो उन का वह खाता वक्त- बेवक्त हमारे कितने काम आया : तुम्हारी शादी में, अरुण की शादी में, तरुण की पढ़ाई में…..”                  “वही सोच कर