उन्होंने वाणी को विराम देना ही आवश्यक समझा। उन्होंने अपने ही जवाब से कई सवाल खड़े कर दिए थे। अपनी मानसिकता छुपाने के चक्कर में छुपी हुई मानसिकता को उन्होंने उजागर कर दिया था। विकास के सारे दावे गलत सिद्ध हुए।रामभजन सिंह, उंची कद-काठी, गोरा-चिट्टा चेहरा और गोल-मटोल तोंद लिए जहाँ भी प्रवेश करते तो लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते। अपने भाषण में भजन की प्रस्तूती यदा-कदा वो कर ही दिया करते थे।अपने गोदाम में रखे अनाज के सड़ने के सवाल के जवाब में पहले तो उन्होंने जोरदार ठहाका लगाया और फिर दांत निपोर कर कहा ’’ थोड़ा