करीब एक घंटे बाद, जब मनोरमा और वंशिका की बहस थककर शांत हुई, तो घर में एक भारी सन्नाटा पसर गया। वंशिका अपने कमरे में लौट गई, उसका शरीर टूट रहा था पर मन पत्थर हो चुका था। मनोरमा अपने बिस्तर पर गिर पड़ीं, उन्हें पहली बार लगा कि उन्होंने अपनी बहू को हराने के चक्कर में अपने बेटे को ही खो दिया है।भूपेंद्र और काया रसोई से बाहर निकले। काया के चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति थी और भूपेंद्र की आँखों में वही लाल घेरे। उसने हॉल में खड़ी वंशिका को एक बार फिर हिकारत से देखा, जैसे