सर्वभूतेषु

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​सर्वभूतेषु कमल चोपड़ा                          ​देवियाँ थीं कि प्रगट नहीं हो रही थीं। हलवा-पूड़ी-छोले सब-कुछ तो तैयार कर चुकी थी विमला। इन्तजार था तो बस कन्याओं का। मुहल्ले में से पूजन के लिए नौ कन्याएँ जुटाना मुश्किल हो रहा था, लेकिन...उसके पति गुप्ताजी कभी इसके घर, कभी उसके घर जा-जाकर कन्याओं को आमन्त्रित कर रहे थे। गिने-चुने घरों में कन्याएँ थीं, जो थीं वो भी छोटी-छोटी लाल-लाल चूड़ियाँ पहने कभी इसके घर, कभी उसके घर आ-जा रही थीं। नवरात्रों का अन्तिम दिन था आज।​आसपास के सभी घरों से टेपरिकॉर्डरो