हिरण्याक्ष-वध की कथाहिरण्यकश्यपु ने बड़े अच्छे ढंग से समझा-बुझाकर प्रह्लाद को पुनः आश्रम में भेज दिया। जैसा कि हिरण्यकश्यपु ने आश्रम के आचार्यों को आश्रम का पुनर्निरीक्षण करने की बात कहीं थी तो उन्होंने वैसा ही किया, किंतु उन्हें ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह सिद्ध होता है कि कोई प्रह्लाद के मन में विप्लवकारी विचारों का प्रतिपादन कर रहा हो। आचार्य स्वयं आश्चर्यचकित थे कि प्रह्लाद के मन में इस तरह के विचार कैसे उपजे। अंततः एक दिन उन्होंने पूछ ही लिया, “वत्स! ये हाहाकारी विचार तुमने कहाँ से ग्रहण किए, जिनसे संपूर्ण असुर समाज को घातक हानि