अदृश्य पीया - 21

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(घर में सन्नाटा है। दीवार घड़ी की टिक-टिक साफ़ सुनाई दे रही है।)(Mr. राणा सोफ़े पर बैठे हैं। नींद नहीं आ रही। हाथ में वही चश्मा है जिसे राधिका ने चुपके से रख दिया था।)Mr. राणा (खुद से) बोले - “राधिका कुछ दिनों से बदली-बदली सी है… बच्चे भी… जैसे किसी से बात करते रहते हों।”(वो चश्मे को घूरते हैं… फिर धीरे से पहन लेते हैं।)(जैसे ही चश्मा आँखों पर चढ़ता है— कमरे का सन्नाटा टूटता है।)(खिड़की के पास एक आदमी खड़ा है। शांत, गंभीर, आँखों में थका हुआ सुकून।)Mr. राणा (हड़बड़ाकर खड़े होते हुए) बोले - “क…कौन है वहाँ?!”(कौशिक मुड़ता है।