स्त्रीतत्त्वम् — नया अध्याय संवेदना ही स्त्री की मौलिकता है — AgyaT Agyani प्रारम्भिक सूत्र स्त्री की मौलिकता संवेदना है —न पुरुष का स्वभाव,न पुरुष की उपलब्धि,न पुरुष के कर्म सीखना। यह एक वाक्य नहीं है।यह एक ब्रह्मसूत्र है —जिसे समझे बिना न स्त्री का जीवन पूर्ण होगा,न पुरुष का। भाग 1: दो दिशाएँ — दो मौलिकताएँ पुरुष का जीवन एक दिशा में चलता है।वह रेखा है — सीधी, तेज़, लक्ष्य की ओर।उसका धर्म है — खोजना, बनाना, जीतना, आगे बढ़ना।