अगली सुबह जब घर के सदस्य डाइनिंग टेबल पर नाश्ते के लिए इकट्ठा हुए, तो सबकी आँखें फटी की फटी रह गई। रसोई से काया बाहर आई, लेकिन वह रोज़ वाली साधारण सूती साड़ी में नहीं थी। उसने वही आसमानी नीली सिल्क की साड़ी पहन रखी थी जिसे भूपेंद्र ने बाज़ार में पसंद किया था। उस साड़ी में काया का रूप निखर कर आ रहा था; वह किसी घर की नौकरानी नहीं बल्कि किसी रईस खानदान की बहू जैसी लग रही थी।वंशिका ने उसे सिर से पाँव तक देखा और उसका माथा ठनका। "काया! यह साड़ी? यह तो कल बाज़ार