“आप को प्रिंसीपल साहिबा ने याद किया है,मैडम,” कस्बापुर के राजकीय महिला डिग्री कालेज का एक चपरासी रमा के भाषण- कक्ष के दरवाज़े से बोला। “कल मिलेंगे,” रमा ने अपनी छात्राओं को छितरा दिया और चपरासी के संग हो ली। “आप के साहब आए हैं, मैडम,” चपरासी ने दांत निपोरे। “तुम्हें कैसे मालूम?” एक सिहरन ने रमा को अपनी मूठ में ले लिया।