और एक प्रयास

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’’ हालात से समझौता सभी करते हैं, मगर पापा, मैं हालात से कुछ वर्ष और लड़ना चाहता हूं, जुझना चाहता हूं मुश्किलों से। हमको मालूम है कि आप जो भी कह रहे हैं अपने अनुभव के आधार पर ही कह रहे हैं, मैं भी उस दुःख-दर्द को अनुभव करना चाहता हूं और मैं विश्वास दिलाता हूं कि मैं हारूंगा नहीं, बल्कि जीत के ही दिखाउंगा। ’’ हरि प्रसाद जी भौचक्के होकर अपने पुत्र विवेक की बातें सुन रहे थे। हरि प्रसाद जी ने गर्दन पीछे घुमाई तो देखा कि सुमित्रा हाथ में चाय का प्याला लिए खड़ी है।हरि प्रसाद जी