अदृश्य: कालचक्र का रक्षक - 4

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अंधेरा इतना गहरा था कि वह आर्यन के वजूद को निगल जाने को उतारू था। उसके गले में लटका वह रहस्यमयी लॉकेट, जो अब तक शांत था, अचानक एक मद्धम नीली रोशनी से थरथराने लगा। वह रोशनी आर्यन की छाती पर पड़ रही थी, जैसे कोई सोता हुआ दानव अपनी आँखें खोल रहा हो।​आर्यन ने कांपते हाथों से उस लॉकेट को छुआ। लॉकेट से निकलती गर्मी उसकी उंगलियों को झुलसा रही थी। तभी उसे महसूस हुआ कि बनारस की वे गलियाँ, जो अब तक खामोश थीं, फुसफुसाने लगी हैं। वह आवाज़ें इंसानी नहीं थीं; वे हवा के साथ रगड़ खाती