देखते ही देखते सगाई का दिन भी आ गया।घर में चारों तरफ खुशी का माहौल था।सब लोग तैयारियों में लगे हुए थे।सीमा और अशोक भी खुश लग रहे थे,और दोनों परिवारों के चेहरे पर भी संतोष दिखाई दे रहा था।सगाई का कार्यक्रम शहर के एक शादी हॉल में रखा गया था।रिश्तेदार और जान-पहचान वाले लोग भी धीरे-धीरे आने लगे।फिर सगाई की रस्में शुरू हुईं —जैसे वर्षों से हमारे समाज में होती चली आ रही हैं।अंगूठियों का आदान-प्रदान हुआ,सबने तालियाँ बजाईं और दोनों को आशीर्वाद दिया।उस पल सब कुछ बहुत सुंदर और खुशियों से भरा लग रहा था —जैसे एक नई