पर्दे के पीछे - 4

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शाम को मिश्राजी घर आए।आकर उन्होंने रोज़ की तरह हाथ-पैर धोए और फिर खाने के लिए बैठ गए।आज का दिन भी बाकी दिनों जैसा ही लग रहा था।ऐसा महसूस ही नहीं हो रहा था कि कुछ बदला है।सभी लोग टीवी देखते हुए चुपचाप खाना खा रहे थे।तभी मिश्राजी ने अपने बेटे से उस नए कानून के बारे में बात की।बेटे ने बताया कि इस कानून का कई जगहों पर ज़ोर-शोर से विरोध हो रहा है, और शायद यह कानून टिक नहीं पाएगा।यह सुनकर मिश्राजी थोड़े परेशान हो गए।पर वे यह भी जानते थे कि केवल एक व्यक्ति की सोच से