भक्त प्रह्लाद - 7

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गुरुकुल की ओर गमनसमय का चक्र बिना किसी अवरोध के निरंतर अपनी धुरी पर घूमता रहता है। उसे किसी की प्रतीक्षा नहीं होती अपितु हर कोई उसी की प्रतीक्षा करता है। संसार में होने वाला परिवर्तन प्रह्लाद को कोई बड़ा आश्चर्य ही दिखाई देता। वे उसके रहस्य को समझने का प्रयास करते और फिर कुछ समझकर और कुछ न समझते हुए व्याकुल हो उठते। उनकी आयु पाँच वर्ष हो चुकी थी, किंतु इतनी छोटी सी आयु में वे सार और असार के ज्ञान से परिचित हो गये थे। संसार में जन्म लेने का उद्देश्य धीरे-धीरे उनकी समझ में आने लगा