मूर्खों की बारात

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मूर्खों की बारात(संस्कार, भक्ति और विवेक की कथा)किसी गांव में रामू नाम का एक गरीब किसान रहता था।उसकी दो बेटियाँ थीं—गौरी और शालू।दोनों बेटियाँ अत्यंत सुंदर होने के साथ-साथ संस्कारवान, विनम्र और मधुर स्वभाव की थीं। बचपन से ही उन्हें भजन-कीर्तन का बहुत शौक था। रामू ने धन तो नहीं जोड़ा था, पर बेटियों को संस्कार और भक्ति का अमूल्य धन अवश्य दिया था।समय बीतते-बीतते दोनों बेटियाँ सयानी हो गईं।अब रामू की पत्नी को उनकी शादी की चिंता सताने लगी।एक दिन वह रामू से बोली—“सुनते हो, अब बेटियाँ बड़ी हो गई हैं। कब तक घर बैठी रहेंगी? लोगों के घरों