(रात का सन्नाटा। घड़ी की टिक-टिक साफ सुनाई दे रही है।कमरे में हल्की नीली रोशनी।)(राधिका की नींद अचानक टूटती है।)राधिका (मन में) बोली - “आज… कुछ अजीब सा लग रहा है…”(वो धीरे से उठती है। बच्चों के कमरे की ओर जाती है।)(आरुषि और आरव गहरी नींद में सो रहे हैं। उनके चेहरे पर अजीब सी शांति है।)राधिका (धीमे स्वर में) बोली - “अजीब है…ये बच्चे हर रात इतने सुकून से कैसे सो जाते हैं…”(तभी उसकी नज़र टेबल पर रखे चश्मे पर पड़ती है। आरुषि का चश्मा।)(राधिका कुछ पल हिचकिचाती है।)राधिका (खुद से) बोली - “बस एक बार…देख ही लेती हूँ।”(राधिका चश्मा पहनती है।