श्रापित एक प्रेम कहानी - 58

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चतूर कहता है ----> आलोक क्यों ना बाईक को कुछ दुर और अंदर ले जाकर दैखते है़ ? आलोक कहता है --> नही यार मैं ऐसै भी ज्यादा करते ही बोला था क्योकी चेतन इतने समय मे इससे ज्यादा दुरी तय नही कर पाएगा। अब हम भानपूर की और जाएगें। आलोक बाईक चलाते हूए गुणा से कहता है--> गुणा यार तु ठीक तो है ना ?  गुणा दर्द से कराहते हुए कहता है--> हां..... आह। मैं ठीक हूँ । आलोक समझ जाता है के गुणा को दर्द हो रहा है। आलोक बाईक को हॉस्पिटल के सामने रोकते हूए कहता है--> गुणा तु अब अंदर जा