रात के सन्नाटे में सुमन करवट बदलकर रवि को धीमे से पुकारती है, सूजे हुए पैरों और कमर के लगातार दर्द के बारे में भर्राई आवाज़ में कहती है, जिसकी हर लफ़्ज़ में दबी हुई कराह छिपी है… लेकिन इसके बाद वह जो कहने वाली थी, वही सच में चौंका देने वाला था।...रवि ने झल्लाहट में अपनी आँखों से बांह हटाई और मोबाइल की स्क्रीन पर समय देखा। रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे।"सुमन, प्लीज यार! अभी ऑफिस की टेंशन कम नहीं है जो तुम घर की रामायण शुरू कर देती हो? सुबह से शाम तक घर पर रहती