“अंदर के डर से लड़कर खुद की जीत तक“हार का पहला स्वादअर्जुन को हमेशा लगता था कि उसके अंदर कुछ खास है।लेकिन “लगना” और “साबित करना” दो अलग चीजें होती हैं और वह यह बात उस दिन समझ पाया, जब पूरी कक्षा के सामने उसका नाम असफल छात्रों की सूची में पुकारा गया।“अर्जुन चौधरी फेल।”शब्द छोटे थे, लेकिन असर भारी।कुछ लड़के मुस्कुराए।कुछ ने पीछे मुड़कर उसे देखा।कुछ ने धीरे से फुसफुसाया “फिर से…”अर्जुन की उंगलियाँ कांप रही थीं। वह अपनी कॉपी पर नजरें गड़ाए बैठा रहा, जैसे अगर वह ऊपर देखेगा तो दुनिया टूट जाएगी। उसकी छाती में अजीब सा